पहला भाग, विद्यालय से शुरू होता है | यूं समझिये यह गुरु और शिष्य के परस्पर द्वन्द और संघर्ष का चरण होता है | संघर्ष एक दुसरे को प्रताड़ित करने का | शिक्षक मानो सोच के आता है , कि आपके जीवन से रस कैसे छीने , और आप भी ठाने हो , कि कैसे अनुशासन भंग करके उसे उसके प्रायोजन में असफल करें | मास्टर को चिड़चिड़े का पर्याय के रूप में , इसी चरण में देखा और समझा जा सकता है | जैसे , दो पत्थरों के पारस्परिक घर्षण से अग्नि कि उत्पत्ति होती है , ऐसे ही इस गुरु शिष्य के शाश्वत घर्षण से कुछ छात्रों में चेतना जागती है | इस चेतना से जागृत छात्र , जान जाते हैं की पढाई लिखाई सब मिथ्या है | अक्सर ये जागृत वर्ग ही कालांतर में नेता बनता है | जिन मूर्खों में यह चेतना नहीं जागति , वो आगे के चरण में पहुँच जाते हैं |
दूसरा चरण है, जब विद्यालय आपको प्रताड़ित करने के लिए काफी नहीं रहता , और आपको कोचिंग सेण्टर में ठूँस दिया जाता है | इनका संचालन अक्सर एक कारखाने कि तरह होता है | जहाँ आपको आपकी संभावित रैंक के आधार पर batches में बांटा जाता है , जैसे कोई कुशल कारीगर नमकीन की फैक्ट्री में , अच्छी और बुरी भुजिया अलग कर रहा हो | ये बढ़िया वाली में dry fruits डालकर , अच्छा पैकेट बनाकर महंगे में बेचेंगे और बेकार को छोटे कस्बो में | बच्चों को unique या special कहना या मानना पाश्चात्य परंपरा है | हमारे यहाँ हर बच्चे को एक standardized परीक्षा की रैंक माना गया है | वो रैंक जो उसकी औकात या हैसियत तय करेगी | इसका लाभ यह है कि व्यक्ति खुद ही स्वयं को कलपुर्जा समझ जाता है, जो व्यावसायिक जीवन में भी बड़ा काम आता है | अंग्रेज कभी खुशफहमी से निकल ही नहीं पाते की वो स्पेशल हैं !! हलांक ही , मुझे डर है कि पेपर लीक आदि के चलते , विद्या के ये महान मंदिर ठप्प ना हो जाएं | मुझे विश्वास है , कि सरकार को भी यह चिंता होगी कि लीक आखिर हुआ कैसे ! जी नहीं , पेपर लीक नहीं , वो तो होता ही होगा, पर ये बात की पेपर लीक हो गया है, ये बात कैसे लीक हुई, इसपर सरकार अवश्य ही चिंतित होगी ?
तीसरा चरण समझिये कथित उच्च शिक्षा अर्थात कॉलेज का | यहाँ आप शिक्षा नहीं, दीक्षा लेने आते हैं | आपको मतलब आपकी डिग्री और नौकरी से, आपके गुरुओं को मतलब उनकी तनख्वाह से | तो अब कोई किसी को प्रताड़ित नहीं करता (हाँ अगर आप phd जैसा कुछ कर रहे हैं , तो आपके गुरु आपको निजी सहायक कि तरह काम में ले सकते हैं , घर या कॉलेज में , वो अलग बात है)| इस चरण तक आते आते, पारस्परिक संघर्ष , अरुचि में बदल जाता है | ये संस्थान उच्च शिक्षा देते देते , शिक्षा से बहुत ऊपर उठ चुके हैं | कोई राजनीती के लिए , तो कोई रोमांस के लिए विख्यात है | कोई AI summit में कुत्ता दिखा रहा है , तो कोई फ़र्ज़ी डॉक्टकरी की डिग्री बाँट रहा है |
इन तीनो चरण को सफलतापूर्वक पार करके आप , आखिरी चरण पे आते हैं, जहाँ आप स्वयं आज हैं | अब आप watsapp पर ज्ञान खोजते हैं | कुछ लोग करते होंगे आलोचना इस watsapp यूनिवर्सिटी की , मैं तो इसे प्रौढ़ शिक्षा कार्यक्रम की रीढ़ मानता हूँ , और भारत कि शिक्षा व्यवस्था का नेचुरल प्रोग्रेशन। यहाँ आप तर्क और तथ्य से बंधे नहीं | और प्रमाण, उसकी ज़रुरत तो कमज़ोरों को होती है | और आप तो प्रमाणित अभिजात्य और उच्च शिक्षित हैं| तो आप निश्चिंत और निडर होकर , जो चाहे वह तथ्य मान सकते हैं , जो चाहें वह नकार सकते हैं | आप ज्ञान के दास नहीं , ज्ञान आपका दास है|
हमारी व्यवस्था इतनी महान होने के बावजूद कुछ उलटे-सीधे सर्वे कहते हैं , कि हमारा शिक्षा का स्तर कमज़ोर है , भारतीयों में critical thinking नहीं बन रही , भारतीय शोधपत्र अक्सर चोरी के या फ़र्ज़ी होते हैं | सब बकवास है , चोचले हैं अंग्रेजों के , हमें नीचा दिखाने के | मैं कहता हूँ , ज़रुरत क्या है किसी क्रिटिकल थिंकिंग कि ! अजी क्रिटिकल छोड़िये , थिंकिंग की ही | ये सब तो AI भी कर लेगा , पर जो सब उपरोक्त ४ आश्रम में है , वो एक भारतीय ही कर पायेगा |